Tuesday, September 27, 2011

हथेली में रेखाएं इश्वेर बनायीं गयी जन्मकुंडली हैं.यह एक ऐसा माप है

यम यम वापी स्मरण भावं त्याजत्येंते कलेवरम!
तम तामैवेती कौन्तेय सादा तद्भव भावितः!! श्रीमद भगवद्गीता...

शारीर को त्यागते समय मनुष्य जिस भाव को मन में स्मरण करता है उसी भाव को अगले जन्मा में प्राप्त करता है.
श्रीमद्भागवत में भी रजा जड़ भारत की कथा आती है वे बड़े ज्ञानी वैरागी परमहंस होते हुए भी अंतिम समय में एक हिरनी पर असक्त हो गए
और अगले जन्मा में हिरन बनना पड़ा.


जीव अपने अच्छे कर्मो से उत्तरोत्तर (आफ्टर एवेरी बिर्थ) refind होता जाता है , और वह बेहतर कर्मो के प्रति जागरूक होकर उन्हें करने का संकल्प लेने लगता है, जितना यह ज्ञान बढ़ता है उतनी स्वतंत्रता बढती है की उसे कहाँ जन्मा लेना है और क्या कर्म करना है.

इस बात पर सभी धर्म एवं गुरु सहमत हैं की हर जीवात्मा में परमात्मा का अंश है हर जीव अपने कर्म करने के लिए स्वतंत्र है, उसके कर्मो की गति उर्ध्वा -अधो के आधार पर फल मिलते हैं. ज्ञान भक्ति तप सेवा एवं त्याग से जीव का उर्ध्वगमन होता हैं जबकि हिंसा व्यभिचार मद्यपान एवं लोभ से अध्ह्पतन होता है जिससे जीव का विवेक नाश्ता हो जाता है और वह मोहा में मूर्छित होकर जन्मो-२ तक उन्ही वासनाओ में भटकता रहता है यह एक दुष्चक्र बन जाता है,

ज्ञानीजन मानते हैं की जब आत्मा गर्भ में प्रवेश करती है तो उसका एक निश्चित संकल्प होता है.और वाही संकल्प गर्भ के दौरान बालक की रेखाओ में अंकित हो जाता है. इसलिए मना जाता है की हथेली में रेखाएं इश्वेर बनायीं गयी जन्मकुंडली हैं.यह एक ऐसा माप है
जिसे दिखाकर हम अपने जीवन की दशा एवं भाग्योदय की दिशा जान सकते हैं.
स्पष्ट है की प्रत्येक बालक अपने जन्मने का मुहूर्त चुनता है,
इसलिए बच्चे को कृत्रिम विधियों से मनचाहे मुहूर्त में जन्मा दिलाना कंप्यूटर के सॉफ्टवेर की प्रोग्रामिंग के साथ छेड़छाड़ करने जैसा है , जिसका फल बच्चो को जन्मो-२ तक भोगना पद सकता है. अतः माता पिता को भाग्य से खिलवाड़ करने से बाज आना चाहिए.
सद्गुरु स्वयं में एक गृह है और वह शिष्य को ग्रहों के चुम्बकीय सम्मोहन से बहार निकाल सकता है बशर्ते शिष्य का विश्वास एवं समर्पण पूरा हो.
लेकिन सिक्के का दूसरा पहलु यह है की गुरुघंटाल शिष्य की श्रधा से खिलवाड़ भी करते हैं अतः जागरूकता हर स्तर पर जरूरी है.






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Thanks

Dr. L K Tripathi


Tuesday, June 7, 2011

swami ramdev is also responsible for result!

स्वामी रामदेव जी की हथेली कि रेखाओ के आधार पर उनके जीवन पर एक दृष्टि--

बाबा का हाथ छोटा नुकीला अध्यात्मिक श्रेणी का है , भाग्य रेखा प्रारंभ में मोटी है-
साधारण परिवार में जन्मा लेकर संघर्षपूर्ण जीवन बिताने के बोजूद बाबा राम देव बहुत योग्य लोकप्रिय दयालु एवं बाल स्वाभाव के है. उनकी सरलता ने उन्हें ऊँचा मुकाम दिया है. उनके व्यक्तित्वा में संतो से अधिक तेज और राजनेताओ से भी अधिक जनप्रियता एवं सर्व स्वीकार्यता है.


बाबा कि हथेली में सूर्य क्षेत्र बलवान है, सूर्य रेखा भी लम्बी है- लेकिन गुरु , शनि कि और झुका है- चन्द्र अति विकसित है-
आज देश का कोई भी नेता इतनी भीड़ नहीं जुटा सकता है. वे बहुत अच्छे teamleader है.
उनके अंदर आत्मा प्रशंशा एवं लोककल्यान का भाव है. लेकिन नेत्रत्वा के गुणों का भाव है.
बाबा दिवस्वप्नादर्शी एवं घोर महत्वाकंशी हैं. बाबा कि सफलता के पीछे उनके ज्ञान कि कम विज्ञापन की भूमिका ज्यादा है,.

ह्रदय रेखा लम्बी है, हेड लाइन सीधी है- लाइफ लाइन से जुडी है, रातोंरात सब क़र जाना चाहते है -
वे आदर्शवादी है और सबका भला करना चाहते है लेकिन कैसे करें यह पता नहीं है.
भावनाओ कि नदी में बह जाते हैं.


अंगूठा लम्बा लेकिन पतला है ,तर्क शक्ति बेहतर है बोलते ज्यादा हैं सुनते कम है
वे देशप्रेम एवं राष्ट्र प्रेम का नाम लेकर बहुत बडा परिवर्तन लाना चाहते हैं , लेकिन उनको पूरा करने के लिए जीस साहस एवं त्याग कि जरूरत होती है उसकी उनमे कमी है. वे नाम भगत सिंह जैसा करना चाहते हैं लेकिन परिणाम से डरते हैं.( अपने अनुयायियों को अकेले छोड़कर, महिलाओ के कपडे पहनकर भाग जाना , और कहना मेरा एन्कोउन्टर हो जाता? अगर संकल्प लिया हैं तो त्याग भी करना होता है, सन्यासी को जीवन से कैसा मोह.)

४२ वे साल भाग्य में परिवर्तन सन्यास (शनि) से संसार ( गुरु ) कि ओर-
बाबा के जीवन में बहुत बडा change आया है वे धर्मगुरु से जननेता में बदल चुके है. उनको जल्दी अपनी भूमिका स्पष्ट करनी होगी अन्यथा
इमागे ख़राब होगी और जनाधार खिसकेगा. निष्कासित एवं परित्यक्ता लोगो को अपना सलाहकार बना उन्हें महंगा पड़ा.

हथेली में गुरुवालय है और ह्रदय और मष्तिष्क रेखा के बीच दूरी सामान है ( रोयल लाइफ)-
उनके हाथ में खुद किंग बन्ने का योग नहीं है लेकिन आगे भी वे किंग बनाते रहेंगे..उनके सहयोग से सरकारे बनेगी और बिगड़ेगी.
अगर पूरा विश्लेषण किया जाये तो ४ जून के बाद बाबा का demotion हुआ है . उन्होंने सहस विवेक और धैर्य से काम लिया होता तो उनकी तस्वीर और चमकीली दिखाई देती. आगे उन्हें सुरक्षा एवं स्वस्थ्य के पत\रति सतर्क रहना होगा.

बाबा रामदेव के उज्जवल भविष्य एवं प्रगति कि शुभकामनाओ के साथ .

सादर,
Dr. L K Tripathi